कहा जाता है कि यदि हौसला बुलंद हो और मन में कुछ करने का संकल्प तो असंभव काम भी संभव होने लगता है। आज हम बात कर रहे है बिहार के कटिहार जिले के रहने वाले 80 वर्षीय जगदीश प्रसाद साह के बारे में। जिनकी पहचान पूरे इलाके में आरटीआई कार्यकर्त्ता की है। कटिहार जिले के गामिटोला निवासी जगदीश प्रसाद सबसे पहले 1978 में मुखिया बने। बाद में वे लोकदल पार्टी में सक्रिय कार्यकर्ता रहे और जननायक कर्पूरी ठाकुर के साथ राजनीति में सक्रिय रहे। वे जनता पार्टी, जनता दल फिर समता पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता रहे। वहीं लंबे समय तक राजद में जिला प्रवक्ता के तौर पर राजनीति से जुड़े हुए भी रहे। 2006 और 2008 में जब रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव थे, उस समय उन्हें क्षेत्रीय रेल उपभोक्ता सलाहकार समिति का सदस्य बनाया गया था। उस दौरान उन्हें रेलवे में काफी खामियां नजर आती थी, जिसका सुधार नहीं होता था। जिसके कारण 2007 से ही उन्होंने आरटीआई के कार्यकर्ता के रूप में कार्य शुरू किया। रेलवे सहित विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे भ्रष्टाचार को सामने लाने की बीड़ा को उठा लिया। तब से लेकर आज तक वे आरटीआई कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय है। अभी तक वे सूचना का अधिकार कानून के 14 हजार से अधिक आवेदन दे चुके हैं। जिसमें रेलवे के क्षेत्र में ही सबसे अधिक 5000 से 6000 आवेदन देकर सूचना का अधिकार कानून के तहत जानकारी मांगने का काम किया है।
आरटीआई को हथियार बना विभिन्न मामलों को किया उजागर
आरटीआई कार्यकर्ता जगदीश प्रसाद साह ने रेलवे में भ्रष्टाचार और रेल यात्रियों की सुविधा में बढ़ोतरी की मांग को सूचनाएं मांगी। इसके अलावा रेलवे यात्रियों की सुरक्षा की मांग समेत कई मुद्दों को लेकर सूचनाएं मांगी। इसके अलावा सिविल क्षेत्रों में भी उन्होंने आरटीआई लगाया है।
आरटीआई के जवाब में कई बार मिली धमकियां
आरटीआई कार्यकर्ता जगदीश प्रसाद साह ने आरटीआई के माध्यम से आरक्षित टिकट को लेकर आरटीआई के तहत जानकारी मांगी। लेकिन जवाब के बदले उन्हें धमकियां मिलने लगी। उनका मानना है कि सूचना का अधिकार एक ऐसा माध्यम है, जिसकी मदद से लोग अपने हाथों को मजबूत कर सकते हैं। इस कानून के तहत लोग विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे भ्रष्टाचार के मामले को भी उजागर कर सकते हैं।